Pariksha ki Taiyari kaise Kare – परीक्षा की तैयारी कैसे करे

Pariksha ki Taiyari kaise Kare परीक्षाएँ हर किसी के लिए तनाव लेकर आती हैं ; क्योंकि परीक्षाएँ एक तरह की विशेष चुनौतियाँ हैं , जिन्हें हम स्वयं आमंत्रित करते हैं और उन्हें सफलतापूर्वक पार करना चाहते हैं । यह जानते हुए भी कि परीक्षाएँ कठिन होती हैं , हम उनके लिए फॉर्म भरते हैं , उनकी फीस भरते हैं और बहुत दिन पहले से ही हम परीक्षा की तैयारियाँ करते हैं ।

आखिर क्यों ? क्योंकि परीक्षाएँ उत्तीर्ण करने के उपरांत – हम अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं , प्रामाणिकता के साथ हम यह कह सकते हैं कि हमने अमुक परीक्षा उत्तीर्ण की है । परीक्षाओं को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करना हमें जीवन में प्रामाणिक बनाता है , लेकिन परीक्षाएँ उत्तीर्ण करना हर किसी के लिए सरल व सहज नहीं होता , अपितु कठिन व चुनौतियों से भरा होता है

परीक्षाएँ कई तरह की होती हैं , लिखित परीक्षा , मौखिक परीक्षा , प्रायोगिक परीक्षा , ऑनलाइन परीक्षा , व्यावहारिक परीक्षा , ज्ञात एवं अज्ञात परीक्षा आदि । सभी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए व्यक्ति का जाग्रत रहना , होश में रहना , वर्तमान में रहना जरूरी है । कहते हैं कि युद्ध में खड़े हुए सिपाही , समाधि में बैठे हुए व्यक्ति और परीक्षा में शामिल हुए विद्यार्थी इनकी चेतना शिखर पर होती है ।

Pariksha ki Taiyari kaise Kare – परीक्षा की तैयारी कैसे करे

परीक्षा के अवसर पर परीक्षा की तैयारी के लिए पूरी तरह से सजग रहना चाहिए । अनावश्यक सोचना , अपनी योग्यता पर संदेह करना , आशंका करना , नकारात्मक चिंतन ई करते हुए बेवजह तनाव लेने आदि के बजाय सकारात्मक सोचना चाहिए और पूरे मन से पढ़ाई करनी चाहिए ।

समय को ध्यान में रखकर पढ़ाई करे

परीक्षा की तैयारी के समय होने वाले तनाव को कम करने का एक – ही उपाय है कि समय – सीमा का ध्यान रखते हुए अपने त पाठ्यक्रम की तैयारी की जाए ; क्योंकि जितनी अच्छी तैयारी – होगी व उसे दोहराने का क्रम पूरा होगा , उतना ही विद्यार्थियों – का तनाव भी कम होगा ।

खान पान पर ध्यान दे

परीक्षा की तैयारी के समय उचित खान – पान का न ध्यान रखने की भी जरूरत है , अन्यथा विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ सकती है और इससे उनको बहुत नुकसान में हो सकता है ।

पढाई के बीच – बीच में थोड़ा आराम करे

परीक्षा की तैयारी में जितना जरूरी पढ़ाई – करना है , उतना ही जरूरी उसे समझना , मन में दोहराना । यानी मनन करना , जो याद हो गया है , उसे लिखकर देखना – और पढ़ाई के समय बीच – बीच में थोड़ा आराम लेना भी है ।

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लगातार पढ़ाई न करे

जो विद्यार्थी लगातार पढ़ाई करते हैं और आराम नहीं करते , वे प्रायः परीक्षा के समय अपनी पढ़ाई भूल जाते हैं और उसे लिख नहीं पाते , लेकिन जो विद्यार्थी पढ़ाई करने के साथ – साथ विश्राम करने को भी महत्त्व देते हैं , वे अपने पढ़े हुए को गहराई से याद कर पाते हैं और परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं ।

लिखित व मौखिक परीक्षा में मुख्य रूप से हमारी स्मृति , समझ , लिखावट , तर्कपूर्ण ढंग से बोलने व लिखने का तरीका , व्यवहारकुशलता आदि शामिल हैं व परीक्षा में ये विशेष सहयोगी हैं ।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दे

इसके अलावा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य भी परीक्षा को सफल बनाने में सोने पर सुहागा जैसा काम करता है । अतः विद्यार्थीगण परीक्षा में पर्व मनाने की तरह मन में उत्साह रखें और पूरे मन से परीक्षा की तैयारी करते हुए परीक्षाएँ दें ।

यदि परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्तियों की चेतना जाग्रत नहीं है , तो वे उसे उत्तीर्ण करने में असफल होते हैं । हालाँकि हर परीक्षा कठिन नहीं होती , कुछ परीक्षाएँ सरल भी होती हैं और कुछ परीक्षाओं का स्तर क्रमिक रूप से लगातार कठिन होता जाता है ।

नकरात्मक विचारो से दूर रहे

नकारात्मक आशंकाएँ भी उन्हें व्यर्थ का तनाव देती हैं । तनाव का असर केवल परीक्षा देने तक ही सीमित नहीं रहता , अपितु इसके बाद भी रहता है कि पता नहीं , उन्हें अपनी परीक्षा में कितने अंक मिलेंगे , जितनी उन्हें आशा व अपेक्षा है , उतने अंक मिलेंगे या नहीं । विद्यार्थियों में तनाव का असर सबसे अधिक परीक्षा परिणाम आने के पूर्व होता है । विद्यार्थी बड़ी उत्सुकता से अपना परीक्षा परिणाम ( रिजल्ट ) देखने जा

योजनाबद्ध तरीके से पढाई करे

जो बुद्धिमान विद्यार्थी होते हैं , वे योजनाबद्ध ढंग से अपनी पढ़ाई करते हैं और बहुत ही आसानी से बिना किसी – तनाव के परीक्षाओं को अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण कर लेते – हैं । तनाव व परेशानी प्रायः उन विद्यार्थियों को ज्यादा होती है , जो परीक्षा की पहले से तैयारी नहीं करते हैं और इसे उत्तीर्ण करने के लिए शॉर्टकट रास्ते ढूँढ़ते हैं ,

जैसे – पूरा पाठ्यक्रम तैयार न करके केवल चुनिंदा प्रश्नों को ही पढ़ना , अन्य प्रश्नों को छोड़ देना , परीक्षा में आने वाले प्रश्नों का पता लगाने का प्रयत्न और मात्र उन्हें ही पढ़ना , नकल करने के भाँति – भाँति के उपाय खोजना आदि ।

हर विद्यार्थी को अपने जीवन में हर साल एक के बाद एक कक्षाएँ पढ़ते हुए इन्हें उत्तीर्ण करने के लिए परीक्षाएँ देनी पड़ती हैं और यह उसके लिए थोड़ा कठिन होता है ; क्योंकि इन कक्षाओं की पाठ्यसामग्री इस तरह से चयनित की जाती है ,

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जो विद्यार्थियों की अवस्था व आयु के हिसाब से उनके लिए चुनौती प्रस्तुत कर सके और उनके ज्ञान व जानकारियों को भी बढ़ा सके । इसलिए विद्यार्थियों के समक्ष पहले छोटे – छोटे टेस्ट और फिर तीन माह , छह माह में परीक्षाएँ होती हैं , ताकि वे मुख्य परीक्षा के लिए मानसिक रूप से पूर्णत : तैयार हो सकें और आसानी के साथ – इसे भी उत्तीर्ण कर सकें , लेकिन मुख्य परीक्षा ही उनकी । वास्तविक योग्यता के स्तर को दरसाती है । इसलिए यह परीक्षा उनके लिए बहुत विशेष हो जाती है ।

घबराहट से बचे

परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में तनाव व घबराहट का – होना स्वाभाविक है । हर व्यक्ति के अंदर तनाव झेलने की । क्षमता अलग – अलग होती है और हर व्यक्ति इसके लिए | अलग तरह की प्रतिक्रिया करता है । कई बार किशोरों के i लिए परीक्षा के इस तनाव को झेलना बहुत मुश्किल हो • जाता है । व परीक्षा में तनाव होने के कई कारण हो सकते हैं , जैसे – परीक्षा के लिए पूरा पाठ्यक्रम पढ़ना और उसे याद करना , परीक्षा में आने वाले सवालों को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रहना ,

याद किए हुए सवालों को भूल में जाने की फिक्र होना , बिना पढ़े हुए प्रश्नों का आ जाना , पूछे गए प्रश्नों के आधार पर उत्तरों को सिलसिलेबार न लिख र पाना आदि । इसके अलावा परीक्षार्थियों के प्रति परिवार व दोस्तों में बहुत सारी उम्मीदें होती हैं , अपेक्षाएँ होती हैं । आगे किसी अच्छे पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए भी विद्यार्थियों का परीक्षा में अच्छे अंक लाना जरूरी होता है , इस तरह 1 उनके मन – मस्तिष्क में परीक्षा को लेकर तनाव व दबाव होता है ।

मेहनत करते रहे

परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने का दबाव हर विद्यार्थी के ऊपर होता है , लेकिन परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने , टॉप करने यानी सबसे प्रथम स्थान पाने का दबाव भी कुछ विद्यार्थियों के अंदर होता है और अपनी इस महत्त्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए वे अपनी पढ़ाई में बहुत मेहनत करते हैं । जैसे – कई विषयों के अलग – अलग ट्यूशन पढ़ना , घर पर सेल्फ स्टडी करना , अपने पूरे समय को पढाई में नियोजित करना , अपनी कमियों को ढूँढना और उन्हें दूर करना , प्रश्नों को निर्धारित समय में हल करने का पूर्व अभ्यास करना आदि

निराश न हो

इन सब के बावजूद विद्यार्थियों के मन में कई तरह की आशंकाएँ बनी रहती हैं , जैसे – कहीं परीक्षा देने के समय पहले से पढ़ा हुआ सब भूल न जाएँ , कहीं ऐसा न हो कि उन्हें प्रश्न ही समझ में न आएँ और वे उनका उत्तर ठीक ढंग से न दे पाएँ , कहीं ऐसा न हो कि वे प्रश्नों को निर्धारित समय – सीमा में पूरा न कर पाएँ और लिखित परीक्षा में उन प्रश्नों के उत्तर लिखने से चूक जाएँ ।

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कभी – कभी विद्यार्थियों को अपनी आशा के अनुरूप अंक मिल जाते हैं , कभी अपनी अपेक्षाओं से अधिक अंक मिलते हैं और कभी – कभी उनके अंक उनकी अपेक्षाओं से बहुत कम होते हैं , तब वे निराश हो जाते हैं । इसके अलावा जो विद्यार्थी परीक्षा में फेल हो जाते हैं ,

वे भी बहुत निराश होते हैं ; क्योंकि परीक्षा में फेल होने से उनके जीवन का पूरा एक साल बरबाद हो जाता है , उन्हें फिर से आगे बढ़ने के लिए उस कक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए पढ़ाई करनी होती है । इसमें निराश होने , दुःखी व परेशान होने की जरूरत नहीं , अपितु फिर से अपने मनोबल को बढ़ाने , अपनी गलतियों व कमियों से सीखने और पहले से अच्छी मेहनत करने की जरूरत है । परीक्षा ही होती है , जिससे हमें अपने स्तर का , अपनी योग्यता व काबिलियत का पता चलता है ,

अंतिम शब्द

हर व्यक्ति के अंदर अलग अलग तरह की योग्यता होती है और उसे एक ही तरह की – परीक्षा के माध्यम से जाँचा नहीं जा सकता और न ही एक – ही तरह के पाठ्यक्रम को पढ़कर योग्यताओं को निखारा जा । सकता है । इसलिए विद्यार्थियों को अपनी योग्यताओं पर – संदेह नहीं करना चाहिए , अपितु अपने अंदर अन्य योग्यताएँ बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए ।

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