बिहार बोर्ड की धांधली: फ़िल्म अभिनेत्री की तस्वीर लगाकर कर ली परीक्षा पास

घपलेबाजी और नकलबाजी के लिए बिहार में होने वाली परीक्षाएं अक्सर सुर्खियां बनती रही हैं. वहां शायद ही ऐसी कोई परीक्षा होती हो जिसमें कोई गड़बड़घोटाला न हुआ हो और वह मीडिया की खबर न बनी हो.

ताजा मामला सेकंडरी शिक्षकों की भर्ती के लिए होने वाली योग्यता-परीक्षा से जुड़ा है. इसमें एक उम्मीदवार ने ऐसी कलाकारी दिखाई कि परीक्षा में शामिल होने के लिए जारी किए गए प्रवेश-पत्र यानी एडमिट कार्ड पर अपनी फोटो लगाने की बजाय दक्षिण फिल्मों की एक मशहूर अभिनेत्री अनुपमा परमेश्वरन की तस्वीर चस्पा कर ली.

मजे की बात है कि इस पुरुष उम्मीदवार को उसी एडमिट कार्ड के आधार पर परीक्षा केंद्र में जाने दिया गया, उसने टेस्ट भी दिया और उसमें पास भी हो गया.

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अब बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड इस जनाब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिसमें उसका नतीजा भी कैंसिल कर दिया जायेगा.

दरअसल, यह घपला भी तब उजागर हुआ जब आरजेडी की एक स्थानीय नेता रितु जायसवाल ने इससे संबंधित एक वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया.

उक्त वीडियो में इस मामले की शिकायत से जुड़ा एक व्यक्ति तफसील से बता रहा है कि सेकंडरी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट STET में किस तरह से जहानाबाद के उम्मीदवार ऋषिकेश कुमार ने दक्षिण फिल्मों की अभिनेत्री की तस्वीर को अपलोड किया.

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उसने भी इस बात पर हैरानी जताई कि जिस पुरुष परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड पर एक महिला की तस्वीर थी, उसे परीक्षा केंद्र में आखिर कैसे जाने दिया गया. यह भी तो हो सकता है कि उसने यह टेस्ट दिया ही न हो और उसकी जगह किसी युवती ने यह परीक्षा दी हो.

जो भी हो लेकिन या तो यह लापरवाही की हद है या फिर बोर्ड के किसी अधिकारी की मिलीभगत से ही ऐसा संभव है. शिक्षकों की भर्ती के लिए यह टेस्ट 2019 में हुआ था, लेकिन विभिन्न विषयों से संबंधित इसके नतीजे इस मार्च से जून के बीच घोषित किये गए हैं.

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गोलमाल करने वाले कुमार ने यह टेस्ट पास कर लिया है. हालांकि उसने सफाई दी है कि गलती से वह तस्वीर अपलोड हो गई, जिसे सुधारने की कोशिश भी की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.

बिहार बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक ऑनलाइन फॉर्म भरते वक़्त सारी जिम्मेदारी उम्मीदवार की होती है कि वे उसमें सही जानकारी देंगे. हालांकि उन्होंने माना कि यह चूक हुई है जिसे परीक्षा के दौरान ही पकड़ लिया जाना था. अब कार्रवाई चाहे जो भी हो लेकिन लेकिन बिहार परीक्षा बोर्ड की विश्वसनीयता पर बट्टा तो लग ही गया.